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#सत_भक्ति_संदेश कबीर,माला तो कर में फिरै,जिव्हा फिरै मुख मांही।मनवा तो चहुँ दिश फिरै,यह तो सुमरण नांही कबीर परमात्मा जी कहते हैं,अगर माला हाथ में घूम रही है,लेकिन मन चारों दिशाओं में भटक रहा है,तो यह सुमिरन नहीं है।ईश्वर की भक्ति में मन और ध्यान का पूर्ण समर्पण ही सच्चा सुमिरन है
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