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#न_जन्मा_न_मरासंत गरीबदास जी महाराज की वाणी(पारख के अंग से वाणी):-तहां वहां चादर फूल बिछाये, सिज्या छाड़ी पदहि समाये।दो चादर दहूँ दीन उठाई, ताके मध्य कबीर न पाई।।1131।।तहां वहां अबिगत फूल सुवासी, मगहर घोर और चैरा काशी।508th God Kabir NirvanDiwas
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