#न_जन्मा_न_मरासंत गरीबदास जी महाराज की वाणी(पारख के अंग से वाणी):-तहां वहां चादर फूल बिछाये, सिज्या छाड़ी पदहि समाये।दो चादर दहूँ दीन उठाई, ताके मध्य कबीर न पाई।।1131।।तहां वहां अबिगत फूल सुवासी, मगहर घोर और चैरा काशी।508th God Kabir NirvanDiwas

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#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला🤔क्या काल का रूप इतना भयंकर है कि जिसे देखकर अर्जुन जैसा योद्धा भी कांपने लगा।क्या यही कारण है कि पवित्र गीता जी अध्याय 7 श्लोक 25 के अनुसार काल ने अव्यक्त रहने की प्रतिज्ञा की।👉 अवश्य पढ़ें पवित्र पुस्तक ज्ञान गंगा। और जानें गूढ़ रहस्य।

#सत_भक्ति_संदेश परमेश्वर कबीर जी का विधान है कि वे स्वयं सतगुरु रूप में प्रकट होकर यथार्थ भक्ति साधना के नाम मन्त्र स्वयं बताते और वही मन्त्र आदरणीय धर्मदास जी, आदरणीय संत गरीबदास जी (छुड़ानी वाले) आदरणीय संत नानक देव जी, आदरणीय संत घीसा दास साहेब जी को दिए।