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#508वां_GodKabir_निर्वाणदिवसचदरि फूल बिछाये सतगुरू, देखै सकल जिहाना हो। च्यारि दाग से रहत जुलहदी, अबिगत अलख अमाना हो।।(- सतग्रन्थ साहेब में राग मारू से शब्द)संत गरीबदास जी ने अपनी वाणी में प्रमाण दिया है कि बंदीछोड कबीर परमेश्वर जी चार दाग में नहीं आते। अजरो अमर हैं।
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